धर्म को श्रेष्ठ साबित करने की ज़िद शांति को निगल जाती है

आज का इंसान खुद को जितना ज़्यादा धार्मिक साबित करता जा रहा है, उतना ही भीतर से अशांत होता जा रहा है। चारों तरफ धर्म की बातें हैं, लेकिन मन में शांति नहीं है। इसका कारण धर्म नहीं है, बल्कि…

आज का इंसान खुद को जितना ज़्यादा धार्मिक साबित करता जा रहा है, उतना ही भीतर से अशांत होता जा रहा है। चारों तरफ धर्म की बातें हैं, लेकिन मन में शांति नहीं है। इसका कारण धर्म नहीं है, बल्कि…

मनुष्य जिस परमात्मा को जन्मों से खोजता आ रहा है, वह खोज अधिकतर बाहर की दिशा में जाती रही है। किसी ने उसे मंदिरों में ढूँढा, किसी ने ग्रंथों में, किसी ने मूर्तियों और कल्पनाओं में। लेकिन जब मन स्वयं…

आज का मन शांति नहीं चाहता, वह समझना चाहता है। वह हर समय यह जानने की कोशिश में रहता है कि जीवन का अर्थ क्या है, सत्य क्या है, आत्मा क्या है, और मुक्ति कैसे मिलेगी। इसी जानने की भूख…

अपनी भावनाओं को गले का पट्टा मत बनने दो, नहीं तो दूसरे लोग उस पट्टे को पकड़ कर तुम्हें अपना पालतू बना लेंगे। यह बात कठोर लग सकती है, लेकिन सच यही है। इंसान को सबसे आसानी से उसकी भावनाओं…

मंदिर, मस्जिद, गिरजाघर या किसी भी धार्मिक स्थल को लेकर जब हिंसा, विवाद और घृणा देखने को मिलती है, तो एक मूल प्रश्न स्वतः खड़ा हो जाता है कि क्या वास्तव में वहाँ ईश्वर या अल्लाह का वास है। यदि…

आध्यात्मिक क्षेत्र में आज सबसे बड़ा भ्रम यह है कि समाधि को ही मोक्ष मान लिया गया है। बहुत-से साधक यह समझ लेते हैं कि ध्यान की चरम अवस्था, यानी समाधि, प्राप्त होते ही आत्मज्ञान हो जाता है या परमात्मा…

यह बात पहली नज़र में असहज लग सकती है, क्योंकि हमें बचपन से यही सिखाया गया है कि ज्ञान का अर्थ सही उत्तर प्राप्त करना है। लेकिन जैसे ही कोई उत्तर मिलकर मन को पूरी तरह संतुष्ट कर देता है,…

“भीड़ झूठ नहीं बोलती, झूठ तो कोई एक बोलता है, भीड़ उसे सच मान लेती है” — यह पंक्ति सिर्फ एक वाक्य नहीं बल्कि मानव समाज की सबसे खतरनाक सच्चाई को उजागर करती है। हम अक्सर मान लेते हैं कि…

इंसान इस दुनिया में भावनाओं के साथ पैदा होता है। डर, प्रेम, क्रोध, वासना, दुख और ईर्ष्या किसी स्कूल में सिखाए नहीं जाते, ये भीतर से ही जन्म लेते हैं। एक छोटा बच्चा जब रोता है या ज़िद करता है,…

भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र कहलाता है। यहाँ हर पाँच साल में लोग अपने वोट से तय करते हैं कि सत्ता किसके हाथ में जाएगी। काग़ज़ों में यह व्यवस्था बहुत सुंदर लगती है, लेकिन ज़मीनी सच्चाई कुछ और ही…