Category ध्यान और आत्मबोध

इंसान ध्यान की जितनी गहराई में जाता है अपने जीवन को भी उतनी ही गहराई से समझने लगता है?

ध्यान में बैठा एक युवा भारतीय व्यक्ति, जिसके एक तरफ भीड़भाड़ और तनाव भरी शहर की जिंदगी और दूसरी तरफ शांत पहाड़, नदी और सूर्योदय का प्राकृतिक दृश्य है, जो आंतरिक जागरूकता और जीवन की गहरी समझ को दर्शाता है।

आज का इंसान बाहर की दुनिया को समझने में इतना व्यस्त हो गया है कि उसने अपने ही भीतर झाँकना लगभग बंद कर दिया है। हम दिनभर जानकारी इकट्ठा करते हैं, लोगों से मिलते हैं, काम करते हैं और सोशल…

साकार रूप का ध्यान नहीं किया जा सकता ध्यान केवल निराकार का ही किया जा सकता है?

निराकार ध्यान का प्रतीक, ध्यान मुद्रा में बैठा व्यक्ति जो प्रकाश में विलीन हो रहा है, साकार से निराकार की आध्यात्मिक यात्रा

आज के समय में “ध्यान” शब्द बहुत प्रचलित हो गया है। हर व्यक्ति किसी न किसी रूप में ध्यान की बात करता है, कोई उसे शांति का साधन मानता है, कोई सफलता का माध्यम और कोई आध्यात्मिकता का रास्ता। लेकिन…

समाधि की अवस्था में किसका ज्ञान नहीं रहता है

समाधि की अवस्था में अहंकार, विचार और समय के लोप का प्रतीकात्मक चित्र

मनुष्य का पूरा जीवन जानने, समझने और पहचान बनाने में बीत जाता है। हम हर क्षण किसी न किसी रूप में यह जानते रहते हैं कि हम कौन हैं, क्या कर रहे हैं और हमारे आसपास क्या घट रहा है।…

मन की तृप्ति ही परमात्मा की प्राप्ति है! तृप्त मन: खोज का अंत!

मन की तृप्ति और ध्यान से उत्पन्न शांति का प्रतीकात्मक चित्र

मनुष्य जिस परमात्मा को जन्मों से खोजता आ रहा है, वह खोज अधिकतर बाहर की दिशा में जाती रही है। किसी ने उसे मंदिरों में ढूँढा, किसी ने ग्रंथों में, किसी ने मूर्तियों और कल्पनाओं में। लेकिन जब मन स्वयं…